सोमवार, 26 सितंबर 2011

नवरात्र में घटस्थापना

पंडित कल्याण पाठक
शारदीय नवरात्र में घटस्थापना मुहूर्त
-कल्याण पाठक,भिलाई 
शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का पर्व नवरात्रि इस बार आठ दिन का होगा। नवरात्रि पर्व 28 सितंबर से शुरू होकर 5 अक्टूबर को समाप्त होगा। इस बार तृतीया तिथि क्षय हो रही है। द्वितीया व तृतीया तिथि एक ही दिन रहेगी। मां जगदंबा के भक्तों को 29 सितंबर को देवी ब्रह्मचारिणी और चंद्रघंटा की आराधना एक ही दिन करना होगा। यह संयोग सात साल बाद आ रहा है, जो दो साल लगातार रहेगा। 2012 में चतुर्थी तिथि का क्षय होने से नवरात्रि आठ दिनों की होगी।
28 सितम्बर, बुधवार के दिन हस्त नक्षत्र 16.21 तक है।
तत्पश्चात् चित्रा प्रारम्भ होगा, जो घटस्थापना में वर्जित माना जाता है।
बुधवार होने के कारण अभिजित भी वर्जित है।
इसलिए इस दिन घटस्थापना सूर्योदय के पश्चात द्विस्वभाव लग्न कन्या में ही करना श्रेष्ठ है।
घटस्थापना मुहूर्त प्रात: सुबह 6.22 बजे 7.50 बजे तक रहेगा।
 इसके अलावा सूर्योदय से 9.20 बजे तक लाभ और अमृत चौघडिया तथा सुबह 10.49 से दोपहर 12 बजे तक शुभ के चौघडिए में भी घट स्थापना की जा सकती है।
ज्योतिष के अनुसार नवरात्र स्थापना समय सुबह होता है। लेकिन यदि इस दौरान चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग आ जाता है तो वह शुभ नहीं रहता है।
इस बार मां दुर्गा का आगमन नौका पर व गमन मनुष्य के कंधे पर होगा, जो अति शुभ हैपुराण व अन्य धार्मिक ग्रंथों में भगवती के आगमन व प्रस्थान के लिए वाहन की चर्चा है. उन्होंने बताया कि माता का आगमन जनजीवन के लिए हर प्रकार की सिद्धि देने वाला है.
भगवती रविवार व सोमवार को गज (हाथी) पर, शनिवार व मंगलवार को तुरंग (घोड़ा) पर, गुरुवार व शुक्रवार को डोला पर और बुधवार को नौका पर आती हैं. प्रस्थान के संबंध में कहा गया है कि रविवार व सोमवार को महिष (भैसा) पर, शनिवार और मंगलवार को चरणायुद्ध वाहन पर, बुधवार व शुक्रवार को गज (हाथी) पर एवं गुरुवार को नर वाहन पर प्रस्थान करती हैं.

रविवार, 25 सितंबर 2011

अमर सिंह

अमर सिंह की तिहाड़ यात्रा
-पं. विनोद चौबे


नोट के बदले वोट' मामले में पूर्व सपा नेता अमर सिंह के जेल जाने के बाद अब सवालों का तूफान कांग्रेस की तरफ मुड़ गया है। अमर की गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि 2008 में मनमोहन सरकार बचाने के लिए बहुमत जुटाने की कवायद साफ सुथरी नहीं थी। यदि अमर सिंह ने वास्तविकता उगल दी तो सत्ताधारी कांग्रेस का क्या हश्र होगा...? इसको विपक्ष भुनाने में तनिक भी देर नहीं लगायेगा, जिसका प्रभाव उ.प्र.के विधान सभा चुनाव पर पड़ेगा। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जब से अमर सिंह तिहाड़ गयें हैं तभी से कांग्रेस 'नोट के बदले वोट' मामले को लेकर भारी पशोपेश में पड़ी है।
कांग्रेस के आकाओं की नजर अब सोनिया जी के देश लौटने पर टिकी हुयी है। उधर उ.प्र. के विधान सभा चुनाव को देखते हुए। कांग्रेस कोई नया खुलासा करते हुए अमर सिंह को कांग्रेस में शामिल कर मुंह न खोलने के एवज में उ.प्र. की कमान भी दिया जा सकता है। ताकि अमर सिंह उ.प्र.के सवर्णों का वोट कांग्रेस के पाले में डालने का काम करें वहीं दूसरी तरफ मुलायम सिंह को भी नुकसान पहुंचाने की मंशा अमर सिंह का भी पूरा हो सके। हॉलाकि कांग्रेस के तरफ से ऐसा न होने दावा किया जा रहा है, लेकिन अब देखना यह है कि अमर सिंह की चुप्पी क्या गुल खिलाती है..? मुंह खोलते हैं तो क्या फिर घर वापसी भी सम्भव है..? कुल मिलाकर कांग्रेस यह जरूर सोच रही होगी कि...अमर सिंह।़।़।़ प्लीज मुंह मत खोलना।

सरकार मनमोहन सिंह की बची। सरकार बचाने का इशारा मुलायम सिंह ने किया। लेकिन आज न तो कांग्रेस का हाथ है और न ही मुलायम सिंह का साथ। फिर भी अमर सिंह खामोश रहे और खामोशी से तिहाड़ जेल पहुंच गये। यह फितरत अमर सिंह की कभी रही नहीं। तो फिर वह कौन सी मजबूरी है जिसे अमर सिंह ओढ़े हुये हैं। क्योंकि वामपंथियों के समर्थन वापस लेने के बाद संकट में आयी सरकार को बचाने की पहल अगर 10 जनपथ से शुरु हुई थी तो सीधी शिरकत मनमोहन सिंह ने खुद की थी। और तभी मनमोहन सिंह का अमर प्रेम खुलकर दिखा था। याद कीजिये 2008 में जुलाई के पहले हफ्ते में मनमोहन सिंह के घर 7 रेसकोर्स का दरवाजा पहली बार मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह के लिये खुला था। तब प्रधानमंत्री ने सभी सहयोगियो को भोजन पर बुलाया था। और जिस टेबल पर अमर सिंह और मुलायम सिंह बैठे थे उसी टेबल तक चलकर खुद मनमोहन सिंह गये और साथ बैठकर गुफ्तगु के बीच जायके का मजा भी लिया था। उस वक्त यह सवाल सबसे बड़ा था कि सोनिया गांधी ने एक वक्त जब मुलायम-अमर सिह के लिये अपने दरवाजे बंद कर दिये तो फिर कांग्रेस में क्या किसी की हिम्मत होगी जो अमर सिंह के लिये दरवाजे खोले। लेकिन संकट सरकार पर था और लोकसभा में बहुमत का खेल मनमोहन सिंह सरकार को बचाने के लिये ही खेला जाना था तो फिर अमर सिंह के लिये दरवाजा भी 7 रेसकोर्स का ही खुला।
बडा सवाल यहीं से शुरु होता है कि आखिर अदालत की फटकार के बाद सीबीआई ने जब तेजी दिखायी तो सरकार बचाने वाले किरदार तो जेल चले गये। जिन्होंने सरकार बचाने के लिये खरीद-फरोख्त के इस खेल को पकड़ा वह भी जेल चले गये। लेकिन सरकार का कोई खिलाड़ी जेल क्यों नहीं गया और सीबीआई ने सत्ता के दायरे में हाथ क्यों नहीं डाला। यह सवाल इसलिये बड़ा है क्योकि अमर सिंह के आगे का रास्ता उस दौर में लालकृष्ण आडवाणी के राजनीतिक सचिव रहे सुधीन्द्र कुलकर्णी तक भी जाता है और अमर सिंह कुछ बोले तो कटघरे में सरकार और कांग्रेस के वैसे चेहरे भी खड़े होते दिखते हैं, जिन पर सोनिया गांधी को नाज़ है।
तो क्या अमर सिंह की खामोशी आने वाले वक्त में अपनी सियासी जमीन बनाने के लिये राजनीतिक सौदेबाजी का दायरा बड़ा कर रही है। या फिर अमर सिंह जेल से किसी राजनीतिक तूफान के संकेत देकर अपना खेल सत्ता -विपक्ष दोनो तरफ खेलने की तैयारी में हैं। चूंकि अमर सिंह की सियासी बिसात उत्तर प्रदेश के चुनाव से भी जुड़ी है और साथ ही इस दौर में सीबीडीटी और प्रवर्तन निदेशालय की जांच के घेरे में आयी उनकी फर्जी कंपनियो के फर्जी कमाई से भी जुड़ी है। कैश फार वोट की जांच करते करते सीबीआई ने अमर सिंह के उस मर्म को ही पकड़ा, जहां सियासी ताकत के जरीये अपने परिवार और दोस्तो की कमाई के लिये फर्जी कंपनी बनायी तो कमाई से सियासत में अपनी ताकत का अहसास कराते रहे। जिस पंकजा आर्टस नाम की कंपनी की सफेद जिप्सी में ही तीन करोड़ रुपया ले जाया गया, वह पंकजा आर्टस कंपनी में अमर सिंह और उनकी पत्नी की हिस्सदारी है। सीबीडीटी की रिपोर्ट बताती है कि अमर सिंह करीब 45 कंपनियो से किसी ना किसी रुप में जुड़े हैं, जिनके खिलाफ जांच चल रही है।
इन सभी कंपनियों पर सत्ता की प्यार भरी निगाहें तब तक रहीं जब तक अमर सिंह सत्ता में रहे या फिर सत्ता से सौदेबाजी करने की हैसियत में रहे। और सौदेबाजी के इसी दायरे ने उन्हे पावर सर्किट के तौर पर स्थापित भी किया और संकट के दौर में हर किसी के लिये संकट मोचक भी बने। इसलिये जब जब अमर सिंह जांच के दायरे में इससे पहले आये उन्होने सत्ता को भी लपेटा और विपक्ष को भी। बीमारी में मित्र अरुण जेटली के देखने आने को भी इस तरह याद किया जैसे बीजेपी से उनका करीबी नाता है और सरकार बचाने के दौर में काग्रेस के सबसे ताकतवर अहमद पटेल को भी मित्र कहकर यह संकेत देने से नहीं चूके कि उनकी सियासी बिसात पर राजनीतिक सौदेबाजी ही प्यादा भी है और राजा भी। क्योंकि अमर सिंह की शह देने में ही सामने वाले की मात होती और वही से अमर सिंह का आगे का रास्ता खुलता। और यही बिसात हमेशा अमर सिंह को भी बचाती रही। लेकिन पहली बार सौदेबाजी का दायरा बडा होने के बावजूद अमर सिंह का अपना संकट दोहरा है क्योंकि सरकार के सामने भ्रष्ट्राचार पर नकेल कसने की चुनौती है। और देश ने अन्ना आंदोलन के जरीये सत्ता को अपनी ताकत का एहसास करा भी दिया है। इसलिेए अब सवाल यह है कि अमर सिंह के तिहाड जेल जाने के बाद सरकार कितने दिन तक खामोशी ओढे रह सकती है । बीजेपी सिर्फ सरकार पर वार कर अपने सांसदो को व्हीसल ब्लोअर का तमगा देते हुये गिरफ्तारी के तार सुधीन्द्र तक पहुंचने से रोक पाती है। समाजवादी पार्टी अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिये सौदेबाजी का दोष काग्रेस या सरकार पर मढ़ कर अमर प्रेम जताती रहती है जिससे यूपी चुनाव में भ्रष्ट होने के दाग उस पर न लगे। या फिर सभी एक साथ खड़े होकर अमरसिंह की बिसात पर प्यादा बनकर सियासी सौदेबाजी में सबकुछ छुपाने में भिड़ते हैं। और संसदीय लोकतंत्र यह सोच कर ठहाके लगाने को तैयार है कि जिस स्टैडिंग कमेटी के पास भ्रष्टाचार पर नकेल कसने वाला जनलोकपाल बिल पडा है छह दिन पहले तक उसी स्टैडिंग कमेटी के सदस्य के तौर पर अमर सिंह भी थे।
यह अलग बात है कि संसद के भीतर अपराध करने के आरोप में फिलहाल अमर सिंह तिहाड जेल में हैं। इसी आधार पर विपक्ष ने कांग्रेस को घेरना और प्रधानमंत्री से जवाब मांगना शुरू कर दिया, क्योंकि अमर सिंह कांग्रेस सरकार बचाने की कोशिशों के सूत्रधार थे। जबकि कोर्ट और कानून का हवाला देकर कांग्रेस अपना पल्ला झाडऩे में लग गई है।
क्या था मामला:
तीन वर्ष पहले अमेरिका के साथ नाभिकीय करार पर मचे राजनीतिक उफान और वामदलों की समर्थन वापसी के बाद अमर सिंह ने न सिर्फ सरकार को बचाने में बल्कि करार को अंजाम तक पहुंचाने में भी मदद की थी। उसी अहम पड़ाव पर सरकार को सांसदों के वोट की जरूरत हुई थी और विपक्ष के कई सदस्य सरकार के साथ खड़े थे।
अमर सिंह की भूमिका इसलिए भी अहम मानी जाती है क्योंकि सपा के शुरुआती विरोध के बाद उन्होंने ही पार्टी का रुख बदलवाया था।
नोट के बदले वोट प्रकरण सीधे तौर पर भले ही सरकार के विश्वास प्रस्ताव से जुड़ा हो, इसकी पूरी पृष्ठभूमि परमाणु करार से जुड़ी थी।
दरअसल इसी करार के विरोध में वामदलों ने समर्थन वापस लेकर सरकार को अल्पमत में ला दिया था। दबाव में आई सरकार 22 जुलाई 2008 को लोकसभा में विश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी। संप्रग सरकार 5 वोट के मामूली अंतर से बची थी। सरकार के पक्ष में 268 वोट पड़े थे जिसमें सपा के भी 37 वोट शामिल थे। जबकि विरोध में 263 वोट पड़े थे।
मतदान का रोचक पहलू यह था कि विपक्ष के कई सांसद सरकार के साथ खड़े थे, लेकिन वोटिंग की इस जीत से पहले भाजपा के अशोक अर्गल, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगौरा ने लोकसभा के अंदर कथित तौर पर रिश्वत में दिए गए रुपये दिखाकर सनसनी फैला दी थी।
तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने पुलिस को इस मामले की जांच के लिए कहा था। बाद में राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप के बीच कुछ अन्य लोगों के साथ साथ अमर सिंह का भी नाम आया
वहीं कुछ महीने पहले हुए विकिलीक्स खुलासे में कहा गया कि कांग्रेस नेता के एक सहयोगी नचिकेता कपूर ने अमेरिकी दूतावास के एक अधिकारी को बताया था कि सरकार बचाने के लिए कुछ सांसदों को रिश्वत दे दी गई है।
इधर, जनवरी 2009 से शुरू हुई पुलिस जांच में तब तेजी आई जब अप्रैल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने लताड़ लगाया था। उसके बाद कभी अमर सिंह जुड़े रहे संजीव सक्सेना और भाजपा के कार्यकर्ता सुहैल हिंदुस्तानी को गिरफ्तार किया गया था। अमर सिंह के रूप में पहली बड़ी गिरफ्तारी हुई है।
(समाचार लिखने तक अमर सिंह तिहाड़ जेल में थे)

नवरात्र में श्री दुर्गा

kalyan pathak

नवरात्र में श्री दुर्गा सप्तशती महायज्ञ
भगवती शक्ति एक होकर भी लोक कल्याण के लिए अनेक रूपों को धारण करती है। श्ेवतांबर उपनिषद के अनुसार यही आद्या शक्ति त्रिशक्ति अर्थात महाकाली, महालक्ष्मी एवं महासरस्वती के रूप में प्रकट होती है। इस प्रकार पराशक्ति त्रिशक्ति, नवदुर्गा, दश महाविद्या और ऐसे ही अनंत नामों से परम पूज्य है।
श्री दुर्गा सप्तशती नारायणावतार श्री व्यासजी द्वारा रचित महा पुराणों में मार्कण्डेयपुराण से ली गयी है। इसम सात सौ पद्यों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। तंत्र शास्त्रों में इसका सर्वाधिक महत्व प्रतिपादित है और तांत्रिक प्रक्रियाओं का इसके पाठ में बहुधा उपयोग होता आया है। पूरे दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। इस पुस्तक में तेरह अध्याय हैं। शास्त्रों के अनुसार शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य माना गया है। अत: अष्टोत्तरशतनाम रूप बटुक भैरव की नामावली का पाठ भी दुर्गासप्तशती के अंगों में जोड़ दिया जाता है। इसका प्रयोग तीन प्रकार से होता है।
1.     नवार्ण मंत्र के जप से पहले 'भैरवजी के मूल मंत्रÓ का 108 बार जप।
2.     प्रत्येक चरित्र के आद्यान्त में 1-1 पाठ।
3. प्रत्येक उवाचमंत्र के आस-पास संपुट देकर पाठ।
नैवेद्य का प्रयोग अपनी कामनापूर्ति हेतु दैनिक पूजा में नित्य किया जा सकता है। यदि मां दुर्गाजी की प्रतिमा कांसे की हो तो विशेष फलदायिनी होती है।
श्री दुर्गासप्तशती का अनुष्ठान कैसे करें।
1. कलश स्थापना
2. गौरी गणेश पूजन
3. नवग्रह पूजन
4. षोडश मातृकाओं का पूजन
5. कुल देवी का पूजन
6. मां दुर्गा जी का पूजन निम्न प्रकार से करें।
आवाहन : आवाहनार्थे पुष्पांजली सर्मपयामि।
आसन : आसनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि।
पाद : पाद्यर्यो: पाद्यं समर्पयामि।
अघ्र्यम्: हस्तयो: अघ्र्यम् स्नान: ।
आचमन: आचमन समर्पयामि।
स्नान: स्नानादि जलं समर्पयामि।
स्नानांग: आचमन: स्नानन्ते पुनराचमनीयं जलं समर्पयामि।
दुग्ध स्नान: दुग्ध स्नान समर्पयामि।
दहि स्नान: दधि स्नानं समर्पयामि।
घृत स्नान: घृतस्नानं समर्पयामि।
शहद स्नान: मधु स्नानं सर्मपयामि।
शर्करा स्नान: शर्करा स्नानं समर्पयामि।
पंचामृत स्नान: पंचामृत स्नानं समर्पयामि।
गन्धोदक स्नान: गन्धोदक स्नानं समर्पयामि
शुद्धोदक स्नान: शुद्धोदक स्नानं समर्पयामि
वस्त्र: वस्त्रं समर्पयामि
सौभाग्य सूत्र: सौभाग्य सूत्रं समर्पयामि
चंदन: चंदनं समर्पयामि
हरिद्रा: हरिद्रा समर्पयामि
कुंकुम: कुंकुम समर्पयामि
आभूषण: आभूषणम् समर्पयामि
पुष्प एवं पुष्प माला: पुष्प एवं पुष्पमाला समर्पयामि
फल: फलं समर्पयामि
भोग (मेवा): भोगं समर्पयामि
मिष्ठान: मिष्ठानं समर्पयामि
धूप: धूपं समर्पयामि।
दीप: दीपं दर्शयामि।
नैवेद्य: नैवेद्यं निवेदयामि।
ताम्बूल: ताम्बूलं समर्पयामि।
भैरवजी का पूजन करें इसके बाद कवच, अर्गला, कीलक का पाठ करें। यदि हो सके तो देव्यऽथर्वशीर्ष, दुर्गा की बत्तीस नामवली एवं कुंजिकस्तोत्र का पाठ करें।
नवार्ण मंत्र: 'ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चैÓ का जप एक माला करें एवं रात्रि सूक्त का पाठ करने के बाद श्री दुर्गा सप्तशती का प्रथम अध्याय से पाठ शुरू कर तेरह अध्याय का पाठ करें। पाठ करने के बाद देवी सूक्त एवं नर्वाण जप एवं देवी रहस्य का पाठ करें। इसके बाद क्षमा प्रार्थना फिर आरती करें। पाठ प्रारंभ करने से पहले संकल्प अवश्य हो। पाठ किस प्रयोजन के लिए कर रहे हैं यह विनियोग में स्पष्ट करें।
दुर्गासप्तशती के पाठ में ध्यान देने योग्य कुछ बातें
1. दुर्गा सप्तशती के किसी भी चरित्र का आधा पाठ ना करें एवं न कोई वाक्य छोड़े।
2. पाठ को मन ही मन में करना निषेध माना गया है। अत: मंद स्वर में समान रूप से पाठ करें।
3. पाठ केवल पुस्तक से करें यदि कंठस्थ हो तो बिना पुस्तक के भी कर सकते हैं।
4. पुस्तक को चौकी पर रख कर पाठ करें। हाथ में ले कर पाठ करने से आधा फल प्राप्त होता है।
5. पाठ के समाप्त होने पर बालाओं व ब्राह्मण को भोजन करवाएं।
अभिचार कर्म में नर्वाण मंत्र का प्रयोग
1. मारण : ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै देवदत्त रं रं खे खे मारय मारय रं रं शीघ्र भस्मी कुरू कुरू स्वाहा।
2. मोहन : क्लीं क्लीं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे देवदत्तं क्लीं क्लीं मोहन कुरू कुरू क्लीं क्लीं स्वाहा॥
3. स्तम्भन : ऊँ ठं ठं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे देवदत्तं ह्रीं वाचं मुखं पदं स्तम्भय ह्रीं जिहवां कीलय कीलय ह्रीं बुद्धि विनाशय -विनाशय ह्रीं। ठं ठं स्वाहा ॥
4. आकर्षण : ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे देवदतं यं यं शीघ्रमार्कषय आकर्षय स्वाहा॥
5. उच्चाटन : ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे देवदत्त फट् उच्चाटन कुरू स्वाहा।
6. वशीकरण : ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे देवदत्तं वषट् में वश्य कुरू स्वाहा।
नोट : मंत्र में जहां देवदत्तं शब्द आया है वहां संबंधित व्यक्ति का नाम लेना चाहिए।


श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ से कैसे करें मनोकामना पूर्ति..
अध्याय        फल
प्रथम अध्याय    हर प्रकार की चिंता को समाप्त करने के लिए
द्वितीय अध्याय    शत्रु पीड़ा, मुकदमा आदि में विजय के लिए
तृतीय अध्याय    शत्रु दमन
चतुर्थ अध्याय    देवी दर्शन प्राप्त करने के लिए
पंचम अध्याय    देवी भक्ति प्राप्त करने के लिए
षष्ठम अध्याय    दु:ख, भय, व्यापार बाधा निवारण हेतु.
सप्तम अध्याय    मनोवांछित फल प्राप्ति हेतु.
अष्टम अध्याय    वशीकरण एवं मित्रता में प्रगाढ़ता के लिए.
नवम अध्याय    सन्तान प्राप्ति और उन्नति सहित हर प्रकार की कामना पूर्ति हेतु.
दशम अध्याय     राज सत्ता व राजसुख के लिए.
एकादश अध्याय व्यापार उन्नति के लिए.
द्वादश अध्याय    यश और लोकप्रियता के लिए.
त्रयोदश अध्याय    पुन: राज्यस्थापन एवं सत्ता सुख के लिए
तिथियों पर आधारित दुर्गापाठ का फल
1. पूर्णिमा के दिन पाठ व देवी पूजन से सिद्धियों की प्राप्ति होती है.
2. शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को पाठ करने से सुख-समृद्धि घर आती है.
3. शुक्ल पक्ष की अष्टमी और नवमी को पाठ करने से राजयोग और राजसुख की प्राप्ति.
4. शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तथा नवमीं को पाठ करने से भक्ति एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है.
5. शुक्ल पक्ष की षष्ठी से लेकर आगामी नित्य 9 दिनों तक पाठ करने मात्र से अष्ट सिद्धि और 9 निधियों की प्राप्ति होती है.
6. शुक्ल पक्ष की अष्टमी से अगले माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर्यंत लगातार एक माह पाठ करने से भूत-प्रेत आदि दोष समाप्त.श्री दुर्गा सप्तशती के साप्ताहिक दिनों के अनुसार पाठ का फल
1. रविवार : इस दिन पाठ करने से 9 पाठ के बराबर फल प्राप्त होता है.
2. सोमवार : इस दिन पाठ करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है.
3. मंगलवार : इस दिन पाठ करने से 108 पाठ का फल प्राप्त होता है.
4. बुधवार : इस दिन पाठ करने से 1 लाख दुर्गा पाठ का फल प्राप्त होता है.
5. बृहस्पतिवार : इस दिन पाठ करने से सवा लाख दुर्गा पाठ का फल प्राप्त होता है.
6. शुक्रवार : इस दिन पाठ करने से दो लाख दुर्गा पाठ करने का फल प्राप्त होता है.
7. शनिवार : इस दिन पाठ करने से अनंत गुना दुर्गा पाठ का फल प्राप्त होता है.नवरात्र में नैवेद्य से कामना पूर्ति
दिवस      नैवेद्य        कामना पूर्ति
प्रथम    गाय का घी    रोगों का शमन
द्वितीया    शक्कर / गुड़    दीर्घायु के लिए
चतुर्थी    खीर / मालपुआ    नेतृत्व एवं आत्म विश्वास के लिए
पंचमी    केला    व्यापार वृद्धि हेतु
षष्ठी    शहद    दिव्याकर्षण हेतु
सप्तमी    छुआरा / गुड़    गृहबाधा शांति हेतु
अष्टमी    नारियल    गृह कलह शांति हेतु
नवमी    काला तिल    रोग एवं प्रेतादि दोष शमन के लिए
नोट : अनार का फल, खीर, अखरोट, नारियल, पान सुपारी और गुड़हल पुष्प प्रतिदिन चढ़ाना चाहिए। माताजी को दुर्वा चढ़ाना बिल्कुल वर्जित है।

शुक्रवार, 23 सितंबर 2011

कल्याण या धोखा ..?

कल्याण या धोखा  ..?
गुरू जी प्रवचनरत थे.”शास्त्रों के अनुसार…”, वे कह रहे थे,
“धर्म का उद्देश्य मानव कल्याण है.”
चेला मननरत था,बोल उठा,
“मतलब ये गुरू जी कि अपने हिंदू धर्म का उद्देश्य हिन्दुओं का कल्याण करना है.”
गुरू जी थोड़ा सा खीझ गये,
“नासमझ, कल्याण ! मानव मात्र का कल्याण !”
चेला असमंजस में था,
“यानि कि गुरू जी,मानव कल्याण से जो विरत हो वह धर्म नहीं अधर्म है.”
गुरू जी मुस्कुराए, चेला सही दिशा में था.
“यानि कि गुरू जी, हिंदू धर्म यदि किसी अन्य धर्म के मानव मात्र के कल्याण
की गारन्टी नही दे सकता तो वह भी धर्म नही अधर्म है?”
गुरू जी के माथे पर बल पड गये.
“यानि कि धर्म की ध्वजा उठाये ये सब लोग जो नफ़रत फैला रहे हैं, मार-काट
मचा रहे हैं, असल में सभी अधर्मी हैं गुरू जी?”
चेला पूरी श्रद्धा से गुरू जी की ओर प्रश्नवाचक निगाहों से देख रहा था.
पांडा़ल स्तब्ध था.
गुरू जी आंखें चौडा़ए चुप थे.